भारत जहां तीन चीजें बहुत फेमस है गंगा, गांधी और गोरा। गोरा शायद इसलिए क्योंकि गोरों ने यहां काफी समय तक राज किया था , वरना तो हम भारतीयों का रंग गेहुआ कहा जाता है।
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| फाइल फोटो |
गांधी जिन्होंने अपने आंदोलन की शुरुआत ही रंगभेद के खिलाफ खड़े होकर की थी ।उन्हीं का भारत आज भी रंगभेद के दंश से उबर नहीं पाया है। हमारे देश में आज भी महिला के गर्भवती होते ही उसे केसर का दूध या नारियल पानी पीने की मुफ्त सलाह यह कहते हुए दी जाती है कि बच्चा गोरा होगा।
इसमें हमारे सिनेमा का भी बहुत बड़ा रोल रहा है। धूप में निकला ना करो रूप की रानी गोरा रंग काला ना पड़ जाए ,ओ हसीना जुल्फों वाली जाने जहां ,यह झील सी नीली आंखें कोई राज है इनमें गहरा जैसे गाने लोगों की सोच पर प्रहार करते हैं।इस सब के चलते ही लोगों ने गोरे रंग को ही श्रेष्ठ मान लिया है।
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सुंदरता के पैमाने सिर्फ रंग पर ही नहीं ठहरते बल्कि बालों की लंबाई, आइब्रो का पतला या मोटा होना, यहां तक कि होठों के ऊपर कितने बाल होंगे यह भी सुंदरता को तय करता है।
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| फाइल फोटो |
इसका फायदा उठाया बाजार में मौजूद कंपनियों ने और शुरू हुआ कॉस्मेटिक्स का खेल। साल 1919 में आई सबसे पहली फेयरनेस क्रीम अफगान स्नो ,फिर दौर आया फेयर एंड लवली का 1975 ।साल 2005 छुप-छुपकर लड़कियों की फेयरनेस क्रीम लगाने वाले मर्दों के लिए शानदार रहा क्योंकि इसी साल आई फेयर एंड हैंडसम क्रीम खास मर्दों के लिए।







