Tuesday, 16 October 2018

अब तो खाने में भी टेक्नोलॉजी हो गर्ई हावी



विश्व खाद्य दिवस , 16 अक्टूबर को सन 1945 में फूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाईजेशन ऑफ यूनाइटेड नेशंस की स्थापना हुई थी। इस दिन को याद करते हुए प्रति वर्ष दुनिया भर में वल्र्ड फूड डे के रूप में मनाया जाता है। दुनिया चाहें भोजन को  सिर्फ एक पोषक तत्व की तरह ही देखती हो ,पर हम भारतियों की भोजन से  आस्था जुड़ी है। हिन्दू शास्त्रों में भोजन को देवता माना गया है यानी अन्न देवता।
फाइल फोटो
आज आधुनिकता की इस दौड़ में हम हर चीज जल्दी पा लेना चाहतें है फिर वह चाहें नाम हो या पैसा। इस भाग दौड़ भरी जिन्दगी में इंसान इतना व्यस्त होता जा रहा है की उसे जीवन की सबसे जरूरी चीज भोजन की भी फिक्र नहीं रहती। मजेे की बात तो यह है की इस समय को भी लोग बचाना चाहतें है तभी तो अब जमाना इंस्टेंट फूड का आ गया है। इंस्टेंट फूड यानी जो जल्दी बन जाए,जैसे मैगी। सिर्फ इंस्टेंट फूड ही नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी ने भी  खानें को आसान बना दिया है।
जहां एक ओर टेक्नोलॉजी ने हमारें जीवन को आसान कर दिया है तो वहीं इसने हमें आलसी भी बना दिया है। आज जब हम हर चीज एक क्लिक में पा लेते हैं तो ऐसे में भला भोजन कैसे पीछे रह सकता है। आज ना जानें कितने ही तरह के एप्स मौजूद हैं जिन पर मात्र एक क्लिक पर आप घर बैठे खाना मंगा सकतें हैं।




हर सिक्के के दो पहलू होतें है जहा समाज का एक तबका घर बैठे खाने का मजा ले रहा है वही दूसरा  तबका ऐसा भी है जिसे एक समय का खाना भी नसीब नहीं हो रहा है। हालात की गंभीरता को इसे भी समझा जा सकता है कि हमारें देश में पांच में से एक बच्चा कुपोषण का शिकार है। साल 2017 में आई इंटरनेशनल फूड पालिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार  भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 100 वें स्थान पर पहुच गया है। जबकि पिछली रिपोर्ट में यह रैंकिंग 97वें स्थान पर थी।

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