Sunday, 1 April 2018

डिजिटल प्रहार

जी हां ,आज हमें अगर किसी से डरने की जरूरत है तो वह है इस आधुनिक प्रहार यानी डिजिटाइजेशन से ।आज जबकि हम बड़े ही आसानी से तरह तरह के ऐप्स अपने फोन में इंस्टॉल कर लेते हैं और जब वह एप्लीकेशन हमसे शेयर योर प्रोफाइल का ऑप्शन मांगता है तो हम तुरंत ओके पर क्लिक करते हैं ।हममें से शायद ही कोई सोचता है कि इसका भी कोई दुष्प्रभाव हो सकता है और इसी का फायदा उठाकर  फेसबुक जैसी बड़ी कंपनी ने अपने पांच करोड़ यूजर्स का डाटा बिना किसी पूर्व जानकारी के जमा किया। और यह डिजिटाइजेशन की ही तो देन है कि इतिहास में पहली बार सीबीएसई बोर्ड का एनुअल क्वेश्चन पेपर लीक हो गया और व्हाट्स एप पर हर किसी के पास आसानी से पहुंच गया । इसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम सतर्क हैं आज जबकि पूरा देश राइट टू प्राइवेसी की मांग कर रहा है क्या हम खुद उस पर अमल कर पा रहे हैं ।हम खुद ही तो अपनी जानकारी फेसबुक जैसे सोशल साइट्स पर शेयर कर रहे हैं जिसका अगर कोई रिकॉर्ड रखे तो आसानी से हमारी प्राइवेसी भंग हो सकती है ।हम ही तो   फीलिंग लोनी को शेयर पचास आदर्श करके संतुष्ट हो जाते हैं । इसके दूरगामी दुष्प्रभाव के बारे में नहीं सोचते वह तो फेसबुक में डिलीट  पोस्ट का ऑप्शन दे रखा है पर हर सोशल नेटवर्किंग साइट पर यह ऑप्शन मौजूद नहीं है ।जहां एक ओर यह डिजिटाइजेशन हमारे जीवन को आसान बना रहा है वहीं दूसरी और यह एक घातक दंश भी दे रहा है। इससे बचने का उपाय मात्र सतर्कता और सावधानी है।

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